2016年10月10日,星期一

书评:电话


这是一本由国际知名作家,励志演讲人Priya Kumar所著的书。我感谢Priya Kumar的团队向我发送了评论副本。

这本书是关于Arjun的,他的个人和职业生涯都过得很糟糕。当他即将离婚时,阿尔琼因坚持萨杜而前往喜马拉雅山,前往汉姆昆·萨希布朝圣。那时他经历了一段幻想的旅程,使他找到了自己的真实呼唤,因此,从关系破裂中得到了喘息。

这本书让我想起了罗宾·夏尔马(Robin Sharma)卖出法拉利的和尚,它也是基于在喜马拉雅山旅行中实现自我实现的主题。 Priya Kumar以独特的方式讲故事和以不寻常的方式传达信息,Priya Kumar以惊人的方式运用了她的想象力来写下情节。

它包括轻松的灵性,大量当代世界的生活课程和一些喜剧。这是一种非常规的共享寻人信息的方式。作者用这本160页的书来完美地叙述,从未听说过那种情节,是从奇妙的想象中雕刻出来的!

但是,有些事情可能有所不同。其中之一是,在某些地方,某些点被拉长了,否则它们本来就很脆短。其次,幸福的结局仅包括阿琼个人生活经历的变化,而在专业方面则没有。

我对这本书的评分是3.5分(5分)。

(PS:此处表示的评论是根据我的个人阅读经验得出的,无意诽谤,贬低或 
降低该书的销售量,反之亦然。写这篇评论没有给我酬劳。

如果您是作者,并且希望对书进行审阅,请发送电子邮件至 bookreviews@mansiladha.com.

2016年10月9日星期日

तो फिर तू क्यूँ उदास है


तू सशक्त है समर्थ है, तो फिर तू क्यूँ उदास है,
तू गिर ज़रा संभल ज़रा, क्यूँ हो रहा हताश है,

तू रक्त है विरक्त है, तुझी से वक़्त की आस है,
तू जलज है समुद्र तू, बुझा दे जो भी प्यास है,

जो समझे ना तेरी कदर, छेड़ दे तू इक ग़दर,
ये विश्व तेरा सर्वस्व है, अकेला तू फिरे किधर,

पाषाण जो हो राह में, ना पथ पृथक तू करना ,
आँधियों की गति से डर के, ना तू चाह छोड़ना,

हो दूर ग़र अरुण किरण, उसी राह तू ताकना,
जो तन से तू थके अग़र, ना मन से कभी तू हारना ।