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2020年9月2日,星期三

निराला



उसे चंचल चेतन में, छोटे से मन के उपवन में,
अनेक सवाल उठते होंगे, अद्भुत खयाल आते होंगे,

ना जाने क्या सोचता होगा, क्या उसको समझता होगा,
विचित्र दुनिया का हर कोण होगा, विचार वृद्धि का वेग होगा,

पेड़ पौधे उपवन आंगन पहेलियों की कड़ियाँ,
在路上ौड़ती गाड़ियां, पशु पक्षी की किलकारियां, अचरज की होंगी झड़ियाँ,

भाषा और शब्दों की श्रृंखला में टटोलता होगा,
वो कभी अपरिचित अनोखी कहानियां,

क्रोध क्लेश का भावावेश, 
क्या समझे वो करना द्वेष,

ना हंसी ठिठोली करना आये, उसको ना आये परिहास,
欺诈和िषाद निरीह निराला ना जाने वो त्रास,

किसका धन और कैसी माया,
रिश्तों का बंधन है किसने बतलाया,

ना देव दानव को वो पहचाने, ना कीर्तन भजन जाने
वो बैरागी,
简单fित्त से करता विश्वास, विशुद्ध उसका मन अनुरागी,

पूजा अरज से ना साधे काज वो निस्वार्थ,
प्रतिफल और प्रतिकार है विचार निरर्थ,

सदैव रहता है निश्छल निर्मल नदी सा वह 
उत्साहित ,
असीम हो कर छलकती उत्सुकता की गागर,

क्या अपना क्या पराया कैसे रक्त का कौन है जाया,
जिसमे उसने प्रीति देखी मनोवेग ले वो मुस्काया |




2020年4月16日,星期四

कागज़-ए-ख़ाली


मुद्दतों में उठायी कलम हाथों में, 
देख कागज़-ए-ख़ाली हम खो गए,

लफ़्ज़ों के आईने में देख ख़ुदा को,
ख़ुद ही की मौसिकी में मशगूल हो गए,

头脑ो तराशा बेबाक़ अल्फाज़ो में, 
कांटे भी फूल हो गए,

一ूंद गिरी स्याही यूँ दवात से,
फिर छिपे सारे राज़ गुफ़्तगू हो गए,

क्यूं ना करें इन पन्नों से बातें,
ये ही है जो रूठा नहीं करते,

स्याही की छाप से जब पन्ना रंग जाता है,
头脑े निकला हर लफ़्ज़ कागज़ पर रम जाता है,

बोल उठते हैं शब्द, जब ये कागज़ हवा में फड़फड़ाता है,
इत्मिनान देता है कागज़ का टुकड़ा जब मन भर आता है,

说一个ानी और कहानियों में कई कहानी,
头脑ी उड़ान की रफ्तार लिख कर है दर्शानी,

दौड़ भाग में रहते व्यस्त करते हर दम काम काज,
छोड़ के ये सब मद मस्त हो जाते हैं आज।

बुनते है आज ग़ज़ल सुहानी या कोई कहानी,
बातें जानी या अनजानी जो है हमें दुनिया को सुनानी।

2020年3月22日,星期日

फ़ुर्सत



चलिए कागज़ पर कुछ अल्फ़ाज़ लिखते हैं
达拉特ी जो कर रही आराम उस पर साज़ लिखते हैं,
आश्चर्य में पड़ गया विज्ञान,
प्रकृति ने किया वो संग्राम,


亚当ी आदमी की मौत का हो रहा कारक है,
घोर कलियुग का ये आग़ाज़ दिखता है,
प्रकृति के प्रक्षालन का ये संयोग सच्चा है,
दूरियां बढ़ने का योग अच्छा है,


देख लो मोबाइल टीवी या अखबार,
प्रवचन का लगा है अम्बार,
हाथ धोएं, किसी को न छुएं, बुखार ना होये,
ख़ुद की बनाई जेल में गुम होये,


जीवन मे नहीं बस सिनेमा, मॉल और पार्टी हॉल,
फुर्सत भरे दिन रात मिलते कहाँ है हाल फिलहाल ,
बच्चों को घर के काम का आनंद सिखलाये,
Playstation和iPadो दूर हटाएं,


क्यूं ना आज अपने शौक फरमाएं,
परिवार में किस्से कहानियों की चौपाल बैठाएं,
现在我ौका मिला है तो फायदा उठायें,
कुछ लम्हें अपनों के साथ बिताएं |

2019年九月3日星期二

做我自己


作为完美无瑕的母亲,
和崇高的伙伴

厨师,顾问和预告片,
疯狂和朦胧的纳格,

从周末洗衣服开始
还有平日的陶器,

一堆杂货,
还有餐具的棚屋

热心的工人
还有劳动力码头工人,

准备承担所有失败,
但是我不是失败者

我知道这是一个阶段
但是生活变成了种族,

我知道我必须保持怀疑
并且要适应

我非常崇尚虚荣,
因为这是生活的美。

我不能成为你们一个人
所以我喜欢做我!

2019年七月12日星期五

半生日快乐潜水


我们从来不知道
细腻的触感
会让我们如此爱你


我们从来不知道
您会缩短我们的日子,延长夜晚的时间,
我们的衣服变得更加沙哑,生活更加幸福,


我们从来不知道
那些最初的恐惧感会变成压倒性的欢乐,
您将成为我们最喜​​欢的玩具,


我们从来不知道
你内心的纯真会偷走我们的心,
与您一起,我们将从头开始生活,


我们从来不知道
日子会过去多久,
我们很高兴看到您成长,


我们从来不知道
秘密地,我们希望您永远留下一个小婴儿,
永远让我们惊叹不已!


半生日快乐潜水

2019年4月12日,星期五

我的小宝贝儿



我的小宝贝儿,
有一天你会耸立我,
变得聪明聪明

有一天这些时刻可能会消失,
你会成为一个男人,
并有自己的优先事项,

有一天,您将拥有自己的生活,
一个可以称呼自己的家庭,
我会走的

但是直到那时
我会继续培养你
为了照顾你

直到那时,
我会在不眠的夜晚晒太阳,
求你睡觉,想念你的时候,

对于世界来说,您才3个月大,
但是对我来说,你已经12个月大了,
3个月了,其余的都没有,

对于世界来说,你是一个玩具,
当你给予快乐时,他们会爱你,
当你哭泣的男孩回到母亲身边

当我看到你互相学习的时候,
当你的小心脏跳动我的心
我感觉在云九上

当我看到你通过我的责骂无辜地笑着时,
你的小手掌围住我的手指,
我的快乐流连忘返,

我身上的伤疤总会提醒我,
有一天你的每一部分都是我的一部分
以及您如何到达,我们得以幸存,

我身上的疤痕可能永远无法治愈,
但是我对你的爱永远不会消失
因为,我的小男孩,你和我被脐带相连。

2018年2月9日,星期五

रविवार


现在ो हर वार है सोमवार,
सुबह से करते हैं शाम का इंतज़ार,

少年时代े वो दिन थे ख़ुशगवार,
आता था एक दिन कहते थे उसे रविवार,

साईकल पे पीछे बैठने का आनंद था अपार,
सुबह उठ के हो जाते थे हम तैयार,

मोगली, रंगोली और देखते चित्रहार,
चंद्रकांता, तरंग और कृष्णा लगते त्योहार,

चंपक और चाचा चौधरी थे मज़ेदार,
मिट्टी की गुल्लक तोड़ने का इंतज़ार,

होमवर्क देख कर आ जाता बुख़ार,
已应用ा अब जल्दी बड़े हो जायें यार,

雨ात में कागज़ की नाव बनाना,
सितोलिया और साँप सीढ़ी से मन बहलाना,

दोस्तों संग लुका छुपी खेलना,
कट्टी करना फिर एक हो जाना,

गली में क्रिकेट खेलना,
出去ो जाने पर नोंक झोंक करना,

रविवार कहो या संडे उसे कहना,
童年 चला जाए बचपना नहीं खोना।

2018年1月31日,星期三

मोबाइल


झुके रहते है सर आजकल हर पल,
已应用ा है सबका ख़ुदा बदल गया है,

हाथ जोड़े है हर कोई शान से,
प्रार्थना का ये नया ज़रिया निकल गया है,

बातें अब होती कहाँ है आपस में जनाब,
腰部े में हर व्यक्ति चैटिंग से बहल गया है,

मिल आये दुनिया से ऑनलाइन अभी अभी,
你的ों से मिलने का वक़्त बंट गया है,

गिल्ली डंडा खेलना ना जाने ये पीढ़ी,
童年 अब सेल्फी स्टिक में जो अटक गया है,

कागज़ की कश्ती कहाँ तैरती अब बरसात में,
मोबाइल पर उंगलियां दौड़ाने में जो मन भटक गया है |

(免责声明:本帖子无意伤害,诽谤或伤害任何人,性别,宗教,政党,新闻频道,宗教信仰,上帝或任何与其有关的人的感情。如果是的话,我谨此致歉。)

2017年5月29日,星期一

हीरा



नाज़-ओ-हिफाज़त में थे अपने शहर की गलियों में,
तिजोरी में तो सोना भी पीतल हो जाता है,

रखे कदम जो चौखट के बाहर तो समझा,
तराशे जाने पर तो कोयला भी हीरा बन जाता है।

2017年5月17日星期三

खोया हुआ खिलौना और टूटी हुई पेंसिल

在屋顶上िछी जब दरी होती थी,
चाँद के पार एक परी होती थी,

ग़मो की गठरी का बस इतना था बोझ,
bोया हुआ खिलौना और टूटी हुई पेंसिल होती थी,

कट्टी और सॉरी का सिलसिला होता हर रोज़,
रिश्तों के सौदे कि गुफ़्तगू इतनी सस्ती होती थी,

प्रतिस्पर्धा यूँ शुरू और ख़त्म होती थी,
什么时候ागज़ की नाव से रेस दोस्तों संग होती थी,

खाली थे हाथ फिर भी ऊँची उड़ान होती थी,
जेब में भरी एक रंगीन तितली होती थी,

कितनी सरल वो ज़िंदगी होती थी,
टूटी गुल्लक से पायी जब चंद सिक्कों कि अमीरी होती थी,

गर्मी कि छुट्टियों में होता शाम का इंतज़ार,
बर्फ़ के लड्डू कि मिठास ऐसी मोहक होती थी,

क्लास में पूछती जब टीचर क्या बनना है,
पायलट और हीरो कहते हुए चहरे पर चमक होती थी,

ऊंची लगती जब मंदिर की घंटी थी,
बड़े होने की बड़ी जल्दी होती थी,

कैसे लौट आयें वो लड़कपन के दिन,
什么时候ुबह के बाद रात नहीं शामें भी होती थी |

2017年5月14日星期日

क्या तोहफ़ा दूँ तुम्हें माँ



वो ख़फा़ हो फिर भी दुलार देती है,
माँ जुदा हो फिर भी प्यार देती है,

हमारी हर भूल को भूला देती है,
वो माँ ही है जो हमें रोज़ दुआ देती है |

माँ वो है जिसने हमें जीवन दिया है और जिसने अपना जीवन हमें दे दिया है | बहुत विचार किया परन्तु इसके समक्ष कोई भी उपहार तुच्छ प्रतीत हुआ | इसलिए कुछ शब्द ही पिरो दिए इस कविता के रूप में |


क्या 盛宴ार दूँ तुम्हें मैं,
तुमने जीवन दान दिया हैं माँ।

मुस्कान होठों पर सदा सजाये,
तुमने हर बलिदान दिया है माँ।

तुलना कैसे करूँ तुम्हारी,
तुमसा कहाँ है कोई माँ।

चाहे तुम हो रूठी हमसे,
चिंता फिर भी करती माँ।

कहा जगत ने जपो हरि भजन,
मैंने केवल कह दिया "माँ"। 

क्या 盛宴ार दूँ समझ ना आये,
谢谢ै तुमको माँ।

2017年4月17日,星期一

स्याही


मुद्दतों में उठायी क़लम हाथों में, देख कागज़-ए-ख़ाली हम खो गए,
लफ़्ज़ों के आईने में देख ख़ुदा को, ख़ुद ही की मौसीक़ी में मशगूल हो गए |

心里ें तराशा बिखरे अल्फाज़ो को, कांटे भी फूल हो गए,
一ूंद स्याही गिरी दवात से, छिपे सारे राज़ गुफ़्तगू हो गए |

2017年4月10日,星期一

मैंने खुशियां ख़रीद ली


城市ी जगमग छोड़ कर मैंने उगते सूरज की रोशनी ख़रीद ली,
सिनेमा का विकर्षण छोड़ कर मैने किताब के पन्नो की खुशबू ख़रीद ली |

अपेक्षा का आसमान छोड़ कर मैंने प्रतीक्षा की ज़मीं ख़रीद ली,
童年ा दामन छोड़ कर मैंने बचपने की अदाएं समेट ली।

रुई का गद्दा त्याग कर मैंने मां की गोद सहज ली,
दिन की दौड़ धूप त्याग कर मैंने सांझ की छांव सहज ली |

कोलाहल की ध्वनि नकार कर मैंने एक ग़ज़ल ख़रीद ली,
मोबाइल पर दौड़ती अंगुलियों को विराम कर मैंने वक़्त की घड़ियां ख़रीद ली।

सुविधाओं की अनंतता का बोध कर मैंने सुकून की दो रोटियां ख़रीद ली।
ख्वाहिशों को थोड़ा कम किया मैंने और खुशियां ख़रीद ली।

2017年1月4日星期三

नज़र


नज़र नज़र में नज़रिया बदल जाता है,
轻推़र में जीने का जरिया बदल जाता है |

-我的随机想法

2016年12月11日星期日

诗意的努力:心的季节


阳光渐渐衰落,月亮渐渐消失,
微妙是冬日绽放的温暖,
哦,晚上!你慢慢消失。

心 shells the pain out,
泪如雨滴 seldom ever end,
等待,幸福在呼唤!

春天来了,亲爱的亲爱的,
幸福绽放,香气紧贴,
为了爱,我们分享无止境,

一滴忧郁的水,
雷声重生,
梦想使绿色更绿。

2016年10月9日星期日

तो फिर तू क्यूँ उदास है


तू सशक्त है समर्थ है, तो फिर तू क्यूँ उदास है,
तू गिर ज़रा संभल ज़रा, क्यूँ हो रहा हताश है,

तू रक्त है विरक्त है, तुझी से वक़्त की आस है,
तू जलज है समुद्र तू, बुझा दे जो भी प्यास है,

जो समझे ना तेरी कदर, छेड़ दे तू इक ग़दर,
ये विश्व तेरा सर्वस्व है, अकेला तू फिरे किधर,

पाषाण जो हो राह में, ना पथ पृथक तू करना ,
आँधियों की गति से डर के, ना तू चाह छोड़ना,

हो दूर ग़र अरुण किरण, उसकी राह तू ताकना,
जो तन से तू थके अग़र, ना मन से कभी तू हारना ।

2015年11月30日,星期一

चूड़ियाँ

मैंने लोगो को कहते सुना है, हाथों में चूड़ियाँ पहनलो | इसका अर्थ है कि आपमें साहस कि कमी है और चूडि़यां पहनने वाले हाथ कमजोर है | किन्तु मैं इससे सहमत नहीं | एक भिन्न दृष्टिकोण से चूड़ियों पर उल्लेख-

预算ी हैं माँ कि चूड़ियाँ,
रसोई में मेरे लिए स्वादिष्ट भोजन पकाने के लिए,
मंदिर की घंटी बजा कर मेरे लिए दुआ का हाथ उठाने के लिए |

预算ी है माँ कि चूड़ियाँ,
मुझे थपकी दे कर सुलाने के लिए,
मुझ पर आशीष बरसाने के लिए |

预算ी रहे ममता भरी ये चूड़ियाँ ||

预算ी है बहन कि चूड़ियाँ,
मुझे सता कर अपने पीछे दौड़ाने के लिए,
मुझ से मीठी नोक-झोंक में कमर पर हाथ रख धौंस जमाने के लिए |

预算ी है बहन कि चूड़ियाँ,
मेरे माथे पर चंदन का टीका लगाने के लिए,
मेरे हाथों में राखी सजाने के लिए |

预算ी रहे शरारत भरी ये चूड़ियाँ ||

预算ी है पत्नी कि चूड़ियाँ,
प्रतीक्षारत हाथो से दरवाज़ा खोलने के लिए,
मुझे आलिंगनबद्ध कर मनुहार जताने के लिए |

预算ी है पत्नी कि चूड़ियाँ,
मेरी पसंद के पकवान बनाने के लिए,
मेरे घर आँगन को सँवारने के लिए |

预算ी रहे प्रेम भरी ये चूड़ियाँ ||

预算ी है बेटी कि चूड़ियाँ,
मेरे घर को अपनी किलकारियों से सजाने के लिए,
नन्हे हाथों से गुड्डे गुड़ियों संग खेलने के लिए |

预算ी है बेटी कि चूड़ियाँ,
ससुराल जाते हुए छुप कर आँसू पोंछेने के लिए,
दौड़ते हुए मेरे सीने से लग जाने के लिए |

预算ी रहे मासूमियत भरी ये चूड़ियाँ ||

2015年8月9日,星期日

美好的结局?


我一生渴望获得幸福的结局,
随着年龄的增长,我将永远等待永无止境的一切,

过去的黄金时刻非常罕见,
是我几乎没有给他们任何照顾,

现在我想知道我是否能再次得到那些时刻,
我决定永远不为任何痛苦而哀悼,

真正的智慧迟早会浮现在我身上,
这不是结局,而是整个过程。




2015年6月7日,星期日

दर्जन भर कॉपियां


याद आया आज स्कूल वाला जून जुलाई का महीना,
ख़त्म होती थी जब गर्मी की छुट्टियां,
पापा के साथ लाते दर्जन भर कॉपियां,
लाते बड़े नाप की नयी नवेली यूनिफॉर्म |

नया बस्ता नयी बोतल,
कॉपियों के पसंदीदा लेबल,
चार रंगों वाला पेन और अप्सरा की पेंसिल,
बारिश में स्कूल जाने कि होती चहल पहल |

सौंधी सी नयी क़िताबो की महक,
दोस्तों से मिलने की अभिलाषा की चहक,
छुट्टियों के किस्सों वाली बातों की खनक,
नयी क्लास में साल बिताने की ललक |

स्कूल बस में साथियों का शोर,
 सुबह असेंबली में प्रार्थना कि कतार,
做े हर रोज़ रविवार का इंतज़ार,
देखते दूरदर्शन पर तरंग और चित्रहार ||
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现在ोता है हर महीना एक समान,
ना किताबें ना उनके लेबल,
现在停止ीबोर्ड पर दौड़ती उंगलियां और ऑफ़िस की टेबल,
ना बजती छुट्टी की घंटियाँ |

ना भोर कि ख़बर ना डूबते सूरज पर नज़र,
现在几点ोती है सहर और ढलता है दिन किस पहर,
ना ख़ुशनुमा मौसम, ना त्यौहार सा रविवार,
ना यूनिट टेस्ट का भार, ना टीचर की डांट का शिकार ||

2015年4月6日,星期一

शख़्सियत


像这样ोगो को हँसाना मेरी आदत ना समझो,
每一步िश्ते बनाने की इसे शिद्दत ना समझो |

खुदगर्ज़ी है मेरी और मुझे खुदगर्ज़ समझो,
मेरे जनाज़े में चलने वालो की तादात बढ़ाने की कोशिश समझो ।|